श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.11.7-8 
अंगनानां सहस्रेण भूषितेन विभूषणै:।
रूपसंलापशीलेन युक्तगीतार्थभाषिणा॥ ७॥
देशकालाभियुक्तेन युक्तवाक्याभिधायिना।
रताधिकेन संयुक्तां ददर्श हरियूथप:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वानर कुलों के प्रधान हनुमान्‌जी ने पान देश को हजारों सुन्दर स्त्रियों से घिरा हुआ देखा, जो नाना प्रकार के आभूषणों से विभूषित थीं, सौन्दर्य की चर्चा करती थीं, वाणी से गीत का अर्थ प्रकट करती थीं, समय और स्थान को समझती थीं, उचित वचन बोलती थीं और मैथुन में खूब भाग लेती थीं॥ 7-8॥
 
Hanuman, the leader of the monkey clans, saw the land of Paan surrounded by thousands of beautiful women, who were adorned with various ornaments, talked about beauty, expressed the meaning of the song through their voice, understood the time and place, spoke the right words and participated a lot in the sexual activities.॥ 7-8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd