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श्लोक 5.11.48  |
स भूय: सर्वत: श्रीमान् मारुतिर्यत्नमाश्रित:।
आपानभूमिमुत्सृज्य तां विचेतुं प्रचक्रमे॥ ४८॥ |
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| अनुवाद |
| तब श्रीमान् पवनकुमार (हनुमानजी) उस पानभूमि को छोड़कर अन्य सभी स्थानों में बड़े यत्न से उन्हें ढूँढने लगे। |
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| Then Shriman Pawankumar (Lord Hanuman) left that Paanbhoomi and started looking for him with great effort in all other places. 48. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे एकादश: सर्ग:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें ग्यारहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ११॥ |
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