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श्लोक 5.11.37  |
निरीक्षमाणश्च ततस्ता: स्त्रिय: स महाकपि:।
जगाम महतीं शंकां धर्मसाध्वसशंकित:॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| उन सोई हुई स्त्रियों को देखकर महाकपि हनुमान्जी धर्म से भयभीत हो गए और उनके हृदय में महान् संदेह उत्पन्न हो गया ॥37॥ |
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| Looking at those sleeping women, the great ape Hanuman became fearful of Dharma. A great doubt arose in his heart. ॥ 37॥ |
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