श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.11.36 
एवं सर्वमशेषेण रावणान्त:पुरं कपि:।
ददर्श स महातेजा न ददर्श च जानकीम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महाबली और तेजस्वी नकलची हनुमान्‌जी ने रावण के सम्पूर्ण हरम की तलाशी ली, तो भी उन्हें वहाँ जननन्दिनी सीता का दर्शन नहीं हुआ ॥36॥
 
In this way, even though Hanuman, the mighty and brilliant copycat, searched the entire harem of Ravana, he could not see Jananandini Sita there. 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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