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श्लोक 5.11.35-36h  |
तासां निद्रावशत्वाच्च मदनेन विमूर्च्छितम्॥ ३५॥
पद्मिनीनां प्रसुप्तानां रूपमासीद् यथैव हि। |
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| अनुवाद |
| निद्रा के प्रभाव में होने के कारण उनका काम-ग्रस्त रूप मुख बंद किये हुए कमल पुष्प के समान प्रतीत हो रहा था। |
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| Due to being under the influence of sleep, His lust-stricken form looked like a lotus flower with closed mouth. |
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