| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना » श्लोक 32-34h |
|
| | | | श्लोक 5.11.32-34h  | चन्दनस्य च शीतस्य सीधोर्मधुरसस्य च।
विविधस्य च माल्यस्य पुष्पस्य विविधस्य च॥ ३२॥
बहुधा मारुतस्तस्य गन्धं विविधमुद्वहन्।
स्नानानां चन्दनानां च धूपानां चैव मूर्च्छित:॥ ३३॥
प्रववौ सुरभिर्गन्धो विमाने पुष्पके तदा। | | | | | | अनुवाद | | उस समय पुष्पक विमान में शीतल चंदन, मदिरा, मधुर रस, नाना प्रकार की मालाएँ, नाना प्रकार के पुष्प, स्नान-सामग्री, चंदन और नाना प्रकार की धूप का भार लेकर सुगन्धित वायु सब दिशाओं में प्रवाहित हो रही थी। | | | | At that time, the fragrant air was flowing in all directions in the Pushpak-vimana, carrying the load of cool sandalwood, wine, sweet juice, various kinds of garlands, various flowers, bathing materials, sandalwood and various kinds of incense. | | ✨ ai-generated | | |
|
|