श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.11.31 
तासामुच्छ्वासवातेन वस्त्रं माल्यं च गात्रजम्।
नात्यर्थं स्पन्दते चित्रं प्राप्य मन्दमिवानिलम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उनके श्वास से उत्पन्न वायु के कारण उनके शरीर पर धारण किए हुए नाना प्रकार के वस्त्र, पुष्पमालाएँ आदि उसी प्रकार धीरे-धीरे हिल रहे थे, जैसे मंद वायु चलने पर हिलते हैं ॥31॥
 
Due to the wind from His breath, the various clothes on His body, garlands of flowers etc. were moving as slowly as they do when a gentle wind blows. ॥31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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