श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.11.29 
शयनान्यत्र नारीणां शून्यानि बहुधा पुन:।
परस्परं समाश्लिष्य काश्चित् सुप्ता वरांगना:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उस भीतरी कक्ष में स्त्रियों के कई बिस्तर खाली पड़े थे और कई सुन्दर स्त्रियाँ एक ही स्थान पर एक-दूसरे को गले लगाकर सो रही थीं।
 
In that inner chamber, many beds of the women were lying empty and many beautiful women were sleeping in the same place, embracing each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)