श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  5.11.28-29h 
क्वचिद् भक्ष्यांश्च विविधान् क्वचित् पानानि भागश:॥ २८॥
क्वचिदर्धावशेषाणि पश्यन् वै विचचार ह।
 
 
अनुवाद
कहीं अलग-अलग तरह की खाने-पीने की चीज़ें अलग-अलग रखी थीं और कहीं आधी-अधूरी चीज़ें बची थीं। उन सबको देखते हुए वह वहाँ इधर-उधर घूमने लगा।
 
Somewhere different types of eatables and drinks were kept separately and somewhere only half of the items were left. Looking at all of them, he started roaming around there. 28 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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