श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  5.11.27-28h 
क्वचिदर्धावशेषाणि क्वचित् पीतान्यशेषत:॥ २७॥
क्वचिन्नैव प्रपीतानि पानानि स ददर्श ह।
 
 
अनुवाद
कुछ घड़ों में आधी मदिरा बची थी, कुछ घड़ों में सारी मदिरा पी जा चुकी थी और कुछ घड़ों में मदिरा बिल्कुल भी नहीं पी गई थी। हनुमान जी ने उन सबको देखा॥27 1/2॥
 
In some pitchers half the wine was left, in some pitchers all the wine had been drunk and in some pitchers the wine had not been drunk at all. Hanuman ji saw them all.॥ 27 1/2॥
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