श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 11: हनुमान जी का पुनः अन्तःपुर में और उसकी पानभूमि में सीता का पता लगाना, धर्मलोप की आशंका और स्वतः उसका निवारण होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.11.2 
न रामेण वियुक्ता सा स्वप्तुमर्हति भामिनी।
न भोक्तुं नाप्यलंकर्तुं न पानमुपसेवितुम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
(उन्होंने सोचा -) 'बहन सीता श्री रामचन्द्रजी से वियोग हो गई हैं। इस अवस्था में वे न सो सकती हैं, न खा सकती हैं, न श्रृंगार और आभूषण धारण कर सकती हैं, और तो और वे किसी भी प्रकार से मदिरा का सेवन भी नहीं कर सकतीं॥ 2॥
 
(They thought -) 'Sister Sita has been separated from Shri Ramchandraji. In this condition she can neither sleep nor eat, nor wear make-up and ornaments, and moreover she cannot consume liquor in any way.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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