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ramayan 5.10.51: वह मोती और रत्नजटित आभूषणों से सुशोभित थी और अपनी सुन्दरता से उस उत्तम महल को सुशोभित कर रही थी ॥ 51॥   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.10.51 
मुक्तामणिसमायुक्तैर्भूषणै: सुविभूषिताम्।
विभूषयन्तीमिव च स्वश्रिया भवनोत्तमम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
वह मोती और रत्नजटित आभूषणों से सुशोभित थी और अपनी सुन्दरता से उस उत्तम महल को सुशोभित कर रही थी ॥ 51॥
 
She was well adorned with ornaments studded with pearls and gems and seemed to beautify that excellent palace with her beauty. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)