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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.10.49 
आतोद्यानि विचित्राणि परिष्वज्य वरस्त्रिय:।
निपीडॺ च कुचै: सुप्ता: कामिन्य: कामुकानिव॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार स्त्रियाँ अपने प्रियतम को छाती से लगाकर सो जाती हैं, उसी प्रकार अनेक सुन्दर स्त्रियाँ विभिन्न वाद्यों को छाती से लगाकर तथा उन्हें छाती के नीचे दबाकर सो गईं।
 
Just as women fall asleep hugging their beloveds to their chest, similarly, many beautiful women fell asleep embracing various musical instruments and pressing them under their breasts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)