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ramayan 5.10.47: निद्रा के बल से हारी हुई एक असहाय स्त्री अपने दोनों हाथों से स्वर्ण घड़े के समान दिखने वाले स्तनों को दबाती हुई सो रही थी।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.10.47 
पाणिभ्यां च कुचौ काचित् सुवर्णकलशोपमौ।
उपगुह्याबला सुप्ता निद्राबलपराजिता॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
निद्रा के बल से हारी हुई एक असहाय स्त्री अपने दोनों हाथों से स्वर्ण घड़े के समान दिखने वाले स्तनों को दबाती हुई सो रही थी।
 
A helpless woman, defeated by the power of sleep, was sleeping pressing her breasts, which looked like golden pitchers, with both her hands. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)