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ramayan 5.10.44: दूसरी स्त्री डिण्डिम लेकर उसके समीप सो गई, मानो कोई स्त्री अपने बच्चे को हृदय से लगाकर सो रही हो ॥44॥   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.10.44 
डिण्डिमं परिगृह्यान्या तथैवासक्तडिण्डिमा।
प्रसुप्ता तरुणं वत्समुपगुह्येव भामिनी॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
दूसरी स्त्री डिण्डिम लेकर उसके समीप सो गई, मानो कोई स्त्री अपने बच्चे को हृदय से लगाकर सो रही हो ॥44॥
 
The other woman took the dindim and went to sleep close to her, as if a lady was sleeping with her child close to her heart. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)