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ramayan 5.10.43: नशे से थकी एक दुबली-पतली और खूबसूरत महिला अपनी बाहों के बीच हाथ रखकर और पनावा को अपनी बांह के नीचे दबाकर सो गई।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.10.43 
भुजपाशान्तरस्थेन कक्षगेन कृशोदरी।
पणवेन सहानिन्द्या सुप्ता मदकृतश्रमा॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
नशे से थकी एक दुबली-पतली और खूबसूरत महिला अपनी बाहों के बीच हाथ रखकर और पनावा को अपनी बांह के नीचे दबाकर सो गई।
 
A slim and beautiful lady, tired from intoxication, fell asleep with her hand between her arms and Panava tucked under her arm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)