Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.10.4: वह उत्तम शय्या सोने से जड़ित होने के कारण अग्नि के समान चमक रही थी। हनुमान जी ने उसे अशोक पुष्पों की मालाओं से सजा हुआ देखा।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.10.4 
जातरूपपरिक्षिप्तं चित्रभानो: समप्रभम्।
अशोकमालाविततं ददर्श परमासनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह उत्तम शय्या सोने से जड़ित होने के कारण अग्नि के समान चमक रही थी। हनुमान जी ने उसे अशोक पुष्पों की मालाओं से सजा हुआ देखा।
 
That excellent bed was gleaming like fire because it was inlaid with gold. Hanuman ji saw it decorated with garlands of Ashoka flowers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)