Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.10.39: सर्वांग सुन्दरी और मनोहर स्तनों वाली एक स्त्री चादर ओढ़कर सो रही थी, मानो कोई प्रेयसी अपने प्रियतम को बहुत दिनों के बाद अपने पास पाकर उसे हृदय से लगाकर सो रही हो ॥39॥   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.10.39 
पटहं चारुसर्वांगी न्यस्य शेते शुभस्तनी।
चिरस्य रमणं लब्ध्वा परिष्वज्येव कामिनी॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
सर्वांग सुन्दरी और मनोहर स्तनों वाली एक स्त्री चादर ओढ़कर सो रही थी, मानो कोई प्रेयसी अपने प्रियतम को बहुत दिनों के बाद अपने पास पाकर उसे हृदय से लगाकर सो रही हो ॥39॥
 
A woman with all-round beauty and lovely breasts was sleeping with the bedsheet under her, as if a lover, having found her beloved near her after a long time, was sleeping holding him close to her heart. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)