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ramayan 5.10.37: वक्षस्थल से वीणा दबाए सोती हुई सुन्दरी ऐसी लग रही थी मानो नदी में पड़ा हुआ कमल किसी नाव में अटक गया हो। 37.   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.10.37 
काचिद् वीणां परिष्वज्य प्रसुप्ता सम्प्रकाशते।
महानदीप्रकीर्णेव नलिनी पोतमाश्रिता॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वक्षस्थल से वीणा दबाए सोती हुई सुन्दरी ऐसी लग रही थी मानो नदी में पड़ा हुआ कमल किसी नाव में अटक गया हो। 37.
 
A beautiful lady sleeping with a Veena pressed to her chest looked as if a lotus lying in the great river had got stuck to a boat. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)