Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.10.29: उसके चारों ओर चार स्वर्ण दीप जल रहे थे, जिनकी चमक से वह जगमगा रहा था और उसके सभी भाग प्रकाशित होकर स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। जैसे बिजली की रोशनी से बादल प्रकाशित होकर परावर्तित हो जाते हैं। | ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके चारों ओर चार स्वर्ण दीप जल रहे थे, जिनकी चमक से वह जगमगा रहा था और उसके सभी भाग प्रकाशित होकर स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। जैसे बिजली की रोशनी से बादल प्रकाशित होकर परावर्तित हो जाते हैं।
Four golden lamps were burning on all four sides of it; due to the radiance of which it was glowing and all its parts were illuminated and clearly visible. Just like the clouds are illuminated and reflected by the electric lights.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥