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ramayan 5.10.28: वह स्वच्छ स्थान पर रखे हुए काले चनों के ढेर के समान दिख रहा था और साँप की तरह साँस ले रहा था। उस उज्ज्वल शय्या पर सोया हुआ रावण गंगा के गहरे जल में सोए हुए राज-हाथी के समान दिख रहा था।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.10.28 
माषराशिप्रतीकाशं नि:श्वसन्तं भुजंगवत्।
गांगे महति तोयान्ते प्रसुप्तमिव कुञ्जरम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वह स्वच्छ स्थान पर रखे हुए काले चनों के ढेर के समान दिख रहा था और साँप की तरह साँस ले रहा था। उस उज्ज्वल शय्या पर सोया हुआ रावण गंगा के गहरे जल में सोए हुए राज-हाथी के समान दिख रहा था।
 
He looked like a heap of black gram kept in a clean place and was breathing like a snake. Ravana sleeping on that bright bed looked like a king elephant sleeping in the deep waters of the Ganges.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)