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ramayan 5.10.27: उसकी आँखें लाल थीं। कमर से नीचे का हिस्सा एक ढीले सफ़ेद रेशमी कपड़े से ढका हुआ था और उसने एक कीमती पीली रेशमी चादर ओढ़ रखी थी।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.10.27 
पाण्डुरेणापविद्धेन क्षौमेण क्षतजेक्षणम्।
महार्हेण सुसंवीतं पीतेनोत्तरवाससा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उसकी आँखें लाल थीं। कमर से नीचे का हिस्सा एक ढीले सफ़ेद रेशमी कपड़े से ढका हुआ था और उसने एक कीमती पीली रेशमी चादर ओढ़ रखी थी।
 
His eyes were red. The part below his waist was covered with a loose white silk cloth and he was wearing a precious yellow silk sheet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)