Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.10.25: उनका चमकता हुआ मुख, जो कुण्डलों से सुशोभित था, अपने स्थान से हट गया और उस स्वर्ण मुकुट से और भी अधिक प्रकाशित हो गया, जिसमें विचित्र चमक थी और जो मोतियों से जड़ा हुआ था। 25. | ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनका चमकता हुआ मुख, जो कुण्डलों से सुशोभित था, अपने स्थान से हट गया और उस स्वर्ण मुकुट से और भी अधिक प्रकाशित हो गया, जिसमें विचित्र चमक थी और जो मोतियों से जड़ा हुआ था। 25.
His shining face, adorned with earrings, was moved from its place and was further illuminated by the golden crown which had a strange luster and was studded with pearls. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥