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ramayan 5.10.2: वहाँ नीलमणि के उत्तम आसन (बिस्तर) बिछे हुए थे, जिनके पैर तथा अन्य भाग हाथीदांत और सोने से जड़े होने के कारण धब्बेदार प्रतीत हो रहे थे। उन अत्यंत मूल्यवान बिछौनों पर बहुमूल्य चटाईयाँ बिछी हुई थीं। इन सबके कारण वह वेदी अत्यंत शोभायमान हो रही थी॥2॥   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.10.2 
दान्तकाञ्चनचित्रांगैर्वैदूर्यैश्च वरासनै:।
महार्हास्तरणोपेतैरुपपन्नं महाधनै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वहाँ नीलमणि के उत्तम आसन (बिस्तर) बिछे हुए थे, जिनके पैर तथा अन्य भाग हाथीदांत और सोने से जड़े होने के कारण धब्बेदार प्रतीत हो रहे थे। उन अत्यंत मूल्यवान बिछौनों पर बहुमूल्य चटाईयाँ बिछी हुई थीं। इन सबके कारण वह वेदी अत्यंत शोभायमान हो रही थी॥2॥
 
There were spread the best seats (beds) made of sapphire, whose legs and other parts looked spotted because they were inlaid with ivory and gold. Precious mats were spread on those extremely valuable beds. Because of all these, that altar was looking very beautiful.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)