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ramayan 5.10.19: वे भुजाएँ खरगोश के रक्त के समान लाल, उत्तम, शीतल और सुगन्धित चन्दन से सुसज्जित तथा आभूषणों से सुशोभित थीं।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.10.19 
शशक्षतजकल्पेन सुशीतेन सुगन्धिना।
चन्दनेन परार्घ्येन स्वनुलिप्तौ स्वलंकृतौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वे भुजाएँ खरगोश के रक्त के समान लाल, उत्तम, शीतल और सुगन्धित चन्दन से सुसज्जित तथा आभूषणों से सुशोभित थीं।
 
Those arms, red like the blood of a rabbit, decorated with the fine, cool and fragrant sandalwood, were adorned with ornaments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)