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ramayan 5.10.18: वे सुगठित और मज़बूत थे। वे गोल थे, वृत्त के समान, और हाथी की सूंड जितनी लंबी और घुमावदार। उस चमकीले बिस्तर पर फैली उनकी भुजाएँ पाँच-पाँच फन वाले दो साँपों जैसी लग रही थीं।   |   ramayan सर्ग 5.10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 10: हनुमान जी का अन्तःपुर में सोये हुए रावण तथा गाढ़ निद्रा में पड़ी हुई उसकी स्त्रियों को देखना तथा मन्दोदरी को सीता समझकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.10.18 
संहतौ परिघाकारौ वृत्तौ करिकरोपमौ।
विक्षिप्तौ शयने शुभ्रे पञ्चशीर्षाविवोरगौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वे सुगठित और मज़बूत थे। वे गोल थे, वृत्त के समान, और हाथी की सूंड जितनी लंबी और घुमावदार। उस चमकीले बिस्तर पर फैली उनकी भुजाएँ पाँच-पाँच फन वाले दो साँपों जैसी लग रही थीं।
 
They were well built and strong. They were round like a circle and were as long and curved as the trunk of an elephant. Those arms spread out on that bright bed looked like two snakes having five hoods each.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)