श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  5.1.98 
सलिलादूर्ध्वमुत्तिष्ठ तिष्ठत्वेष कपिस्त्वयि।
अस्माकमतिथिश्चैव पूज्यश्च प्लवतां वर:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम जल से ऊपर उठ जाओ, जिससे छलांग लगाने वालों में श्रेष्ठ हनुमानजी कुछ समय तक तुम्हारे ऊपर रहकर विश्राम कर सकें। वे भी हमारे आदरणीय अतिथि हैं॥98॥
 
‘Therefore you should rise above the water, so that Hanuman, the best of all leapers, may stay on you for some time and rest. He is also our respected guest.॥ 98॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd