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ramayan 5.1.97: अतः आप हमारी सहायता कीजिए, जिससे हमारा कर्तव्य पालन (हनुमानजी का सम्मान करने का कार्य) करने का अवसर हाथ से न निकल जाए। यदि कर्तव्य पालन न किया जाए, तो वह सज्जनों को क्रोध दिलाता है॥ 97॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  5.1.97 
कुरु साचिव्यमस्माकं न न: कार्यमतिक्रमेत्।
कर्तव्यमकृतं कार्यं सतां मन्युमुदीरयेत्॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
अतः आप हमारी सहायता कीजिए, जिससे हमारा कर्तव्य पालन (हनुमानजी का सम्मान करने का कार्य) करने का अवसर हाथ से न निकल जाए। यदि कर्तव्य पालन न किया जाए, तो वह सज्जनों को क्रोध दिलाता है॥ 97॥
 
‘Therefore, please help us so that the opportunity to perform our duty (the act of honouring Lord Hanuman) does not pass by. If the duty is not performed, it arouses the anger of the good men.॥ 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)