श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  5.1.96 
अस्य साह्यं मया कार्यमिक्ष्वाकुकुलवर्तिन:।
मम इक्ष्वाकव: पूज्या: परं पूज्यतमास्तव॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
ये इक्ष्वाकु कुल के लोग राम के सेवक हैं, इसलिए मुझे उनकी सहायता करनी चाहिए। इक्ष्वाकु कुल के लोग मेरे लिए आदरणीय हैं और आपके लिए भी वे सर्वाधिक आदरणीय हैं।
 
‘These Ikshwaku clan members are servants of Ram, so I should help them. The people of Ikshwaku clan are worthy of my respect and for you they are the most worthy of respect.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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