श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  5.1.95 
स एष कपिशार्दूलस्त्वामुपर्येति वीर्यवान्।
हनूमान् रामकार्यार्थी भीमकर्मा खमाप्लुत:॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
देखो, ये महाबली कपिकेसरी हनुमान तुम्हारे ऊपर से गुजर रहे हैं। ये एक अत्यन्त भयंकर कार्य करने जा रहे हैं। इस समय ये श्री राम का कार्य सिद्ध करने के लिए आकाश में कूद पड़े हैं॥ 95॥
 
‘Look, this mighty Kapikesari Hanuman is passing over you. He is going to do a very dreadful deed. At this time he has jumped into the sky to accomplish the work of Shri Ram.॥ 95॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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