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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  5.1.93 
त्वमेषां ज्ञातवीर्याणां पुनरेवोत्पतिष्यताम्।
पातालस्याप्रमेयस्य द्वारमावृत्य तिष्ठसि॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
इन दैत्यों का पराक्रम सर्वत्र विदित है। ये पुनः पाताल से ऊपर आना चाहते हैं, अतः इन्हें रोकने के लिए आप अथाह पाताल के द्वार बंद करके खड़े हैं॥ 93॥
 
‘The prowess of these demons is known everywhere. They want to come up from the netherworld once again, so to stop them you are standing there closing the gates of the unfathomable netherworld.॥ 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)