श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  5.1.92 
त्वमिहासुरसङ्घानां देवराज्ञा महात्मना।
पातालनिलयानां हि परिघ: संनिवेशित:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
‘शैलप्रवर! महामना देवराज इन्द्र ने पाताल में रहने वाले दैत्यों के निकलने का मार्ग रोकने के लिए आपको यहाँ परिधि के रूप में स्थापित किया है ॥92॥
 
‘Shailpravar! Mahamana Devraj Indra has established you here in the form of a perimeter to block the way out of the demons living in the underworld. 92॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd