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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 91
श्लोक
5.1.91
इति कृत्वा मतिं साध्वीं समुद्रश्छन्नमम्भसि।
हिरण्यनाभं मैनाकमुवाच गिरिसत्तमम्॥ ९१॥
अनुवाद
ऐसा शुभ विचार करके समुद्र ने अपने जल में छिपे हुए सुवर्णमय पर्वत मैनाक से कहा - ॥91॥
Having thought this auspicious thought, the ocean said to the golden mountain Mainaka hidden in its waters - ॥91॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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