Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.1.90: मुझे कोई रास्ता निकालना चाहिए ताकि ये बहादुर बंदर यहाँ आराम कर सकें। मेरी छत पर आराम करने के बाद, वे मेरी बाकी यात्रा आसानी से तय कर लेंगे।'   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  5.1.90 
तथा मया विधातव्यं विश्रमेत यथा कपि:।
शेषं च मयि विश्रान्त: सुखी सोऽतितरिष्यति॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
मुझे कोई रास्ता निकालना चाहिए ताकि ये बहादुर बंदर यहाँ आराम कर सकें। मेरी छत पर आराम करने के बाद, वे मेरी बाकी यात्रा आसानी से तय कर लेंगे।'
 
I should find a way so that these brave monkeys can rest here. After resting in my shelter, they will easily cover the rest of my journey.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)