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ramayan 5.1.9: फिर उन्होंने पूर्व दिशा की ओर मुख करके अपने पिता पवनदेव को प्रणाम किया। तत्पश्चात् कुशल हनुमान्‌ जी दक्षिण दिशा में जाने के लिए (अपना शरीर बढ़ाकर) चलने लगे॥9॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.1.9 
अञ्जलिं प्राङ्मुखं कुर्वन् पवनायात्मयोनये।
ततो हि ववृधे गन्तुं दक्षिणो दक्षिणां दिशम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने पूर्व दिशा की ओर मुख करके अपने पिता पवनदेव को प्रणाम किया। तत्पश्चात् कुशल हनुमान्‌ जी दक्षिण दिशा में जाने के लिए (अपना शरीर बढ़ाकर) चलने लगे॥9॥
 
Then he faced east and bowed to his father Pawandev. After that, efficient Hanuman ji started moving (increasing his body) to go in the south direction. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)