श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  5.1.85 
ऋषयस्तुष्टुवुश्चैनं प्लवमानं विहायसा।
जगुश्च देवगन्धर्वा: प्रशंसन्तो वनौकसम्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
आकाशमार्ग से भ्रमण करते हुए ऋषि-मुनि वानर नायक हनुमान् की स्तुति करने लगे और देवता तथा गन्धर्व उनकी स्तुति के गान गाने लगे॥85॥
 
While traveling through the sky, the sages and sages started praising the monkey hero Hanuman and the gods and Gandharvas started singing songs of his praise. 85॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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