श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  5.1.83 
प्लवमानं तु तं दृष्ट्वा प्लवगं त्वरितं तदा।
ववृषुस्तत्र पुष्पाणि देवगन्धर्वचारणा:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
उस समय वानर योद्धा हनुमान्‌जी को तीव्र गति से आगे बढ़ते देख देवता, गन्धर्व और भाट उन पर पुष्पवर्षा करने लगे॥83॥
 
At that time, seeing the monkey warrior Hanuman ji moving forward at a fast pace, the gods, Gandharvas and bards started showering flowers on him. 83॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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