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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 80
श्लोक
5.1.80
आपाते पक्षिसङ्घानां पक्षिराज इव व्रजन्।
हनुमान् मेघजालानि प्रकर्षन् मारुतो यथा॥ ८०॥
अनुवाद
पक्षीराज गरुड़ के समान पक्षियों के झुंड के मार्ग में विचरण करते हुए हनुमान जी वायु के समान बादलों को अपनी ओर खींचते थे। 80.
Moving like the King of Birds, Garuda, in the path of flocks of birds, Hanuman used to pull the clouds towards himself like the wind. 80.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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