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ramayan 5.1.8: उन्होंने सूर्य, इन्द्र, वायु, ब्रह्मा और भूतों (दिव्य योनियों के विशिष्ट प्राणियों) से भी हाथ जोड़कर उस पार जाने की प्रार्थना की ॥8॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.1.8 
स सूर्याय महेन्द्राय पवनाय स्वयम्भुवे।
भूतेभ्यश्चाञ्जलिं कृत्वा चकार गमने मतिम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने सूर्य, इन्द्र, वायु, ब्रह्मा और भूतों (दिव्य योनियों के विशिष्ट प्राणियों) से भी हाथ जोड़कर उस पार जाने की प्रार्थना की ॥8॥
 
He also requested the Sun, Indra, the Wind, Brahma and the ghosts (special beings of the divine species) with folded hands to cross over to the other side. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)