श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  5.1.73 
तस्य वेगसमुद‍्घुष्टं जलं सजलदं तदा।
अम्बरस्थं विबभ्राजे शरदभ्रमिवाततम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
उस समय समुद्र का जल अपने वेग से ऊपर उठता हुआ बादलों सहित आकाश में स्थित होकर शरद ऋतु के फैले हुए बादलों के समान प्रतीत हो रहा था। 73.
 
At that time, the water of the ocean, rising high with their speed and situated in the sky along with the clouds, appeared like the spread clouds of autumn. 73.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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