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ramayan 5.1.70: कपिश्नाथ हनुमान के शरीर से उठकर बादलों में व्याप्त हुई प्रचण्ड वायु ने गरजते हुए समुद्र में बड़ी उथल-पुथल मचा दी। 70.   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.1.70 
कपिवातश्च बलवान् मेघवातश्च निर्गत:।
सागरं भीमनिर्ह्रादं कम्पयामासतुर्भृशम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
कपिश्नाथ हनुमान के शरीर से उठकर बादलों में व्याप्त हुई प्रचण्ड वायु ने गरजते हुए समुद्र में बड़ी उथल-पुथल मचा दी। 70.
 
The strong wind rising from the body of Kapisrath Hanuman and pervading the clouds caused a great turmoil in the roaring sea. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)