vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
»
श्लोक 68
श्लोक
5.1.68
यं यं देशं समुद्रस्य जगाम स महाकपि:।
स तु तस्याङ्गवेगेन सोन्माद इव लक्ष्यते॥ ६८॥
अनुवाद
वह समुद्र में जहाँ भी जाता, उसके शरीर के बल से लहरें उठतीं, जिससे वह क्षेत्र मानो विक्षुब्ध (अशांत) प्रतीत होता। 68.
Wherever he went in the sea, waves would arise due to the force of his body. Hence, that area would appear as if it was mad (disturbed). 68.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd