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ramayan 5.1.67: हनुमानजी का शरीर समुद्र के ऊपर तैर रहा था और उनकी परछाई जल में डूबी हुई प्रतीत हो रही थी। इस प्रकार महाबली हनुमानजी समुद्र में पड़ी हुई नाव के समान प्रतीत हो रहे थे, जिसका ऊपरी भाग (पाल) वायु से भरा हुआ है और निचला भाग समुद्र के जल को स्पर्श कर रहा है।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  5.1.67 
उपरिष्टाच्छरीरेण च्छायया चावगाढया।
सागरे मारुताविष्टा नौरिवासीत् तदा कपि:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी का शरीर समुद्र के ऊपर तैर रहा था और उनकी परछाई जल में डूबी हुई प्रतीत हो रही थी। इस प्रकार महाबली हनुमानजी समुद्र में पड़ी हुई नाव के समान प्रतीत हो रहे थे, जिसका ऊपरी भाग (पाल) वायु से भरा हुआ है और निचला भाग समुद्र के जल को स्पर्श कर रहा है।
 
Hanuman's body was floating above the sea and his shadow appeared to be submerged in the water. Thus, Hanuman, the great monkey, appeared like a boat lying in the sea, whose upper part (sail) is filled with air and the lower part is touching the water of the sea. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)