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ramayan 5.1.61: आकाश में तैरते समय पवनपुत्र हनुमान की उठी हुई टेढ़ी पूँछ इन्द्र की ऊँची ध्वजा के समान प्रतीत हो रही थी। 61.   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.1.61 
लाङ्गूलं च समाविद्धं प्लवमानस्य शोभते।
अम्बरे वायुपुत्रस्य शक्रध्वज इवोच्छ्रितम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
आकाश में तैरते समय पवनपुत्र हनुमान की उठी हुई टेढ़ी पूँछ इन्द्र की ऊँची ध्वजा के समान प्रतीत हो रही थी। 61.
 
While floating in the sky, the raised crooked tail of Hanuman, the son of the wind, looked like the high flag of Indra. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)