| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना » श्लोक 6 |
|
| | | | श्लोक 5.1.6  | कामरूपिभिराविष्टमभीक्ष्णं सपरिच्छदै:।
यक्षकिंनरगन्धर्वैर्देवकल्पै: सपन्नगै:॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | देवोपम यक्ष, किन्नर, गंधर्व और नाग, जो अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते थे, अपने परिवार सहित वहाँ सदैव निवास करते थे॥6॥ | | | | Devopam Yaksha, Kinnar, Gandharva and Naga, who could take any form as per their wish, always resided there along with their families. 6॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|