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ramayan 5.1.59: लाल नेत्रों वाले वानरों में श्रेष्ठ हनुमान जी की दोनों आंखें बड़ी-बड़ी गोल और पीली थीं, जो चंद्रमा और सूर्य के समान चमकती थीं।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  5.1.59 
पिङ्गे पिङ्गाक्षमुख्यस्य बृहती परिमण्डले।
चक्षुषी सम्प्रकाशेते चन्द्रसूर्याविव स्थितौ॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
लाल नेत्रों वाले वानरों में श्रेष्ठ हनुमान जी की दोनों आंखें बड़ी-बड़ी गोल और पीली थीं, जो चंद्रमा और सूर्य के समान चमकती थीं।
 
Hanuman Ji, the best among the monkeys with red eyes, had both large round and yellow eyes that shone like the Moon and the Sun. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)