Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.1.58: हनुमानजी के नेत्र, जो वायु के मार्ग का अनुसरण करते हुए बिजली के समान चमक रहे थे, ऐसे चमक रहे थे मानो पर्वत पर दो स्थानों पर दावानल भड़क रहा हो ॥58॥ | ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हनुमानजी के नेत्र, जो वायु के मार्ग का अनुसरण करते हुए बिजली के समान चमक रहे थे, ऐसे चमक रहे थे मानो पर्वत पर दो स्थानों पर दावानल भड़क रहा हो ॥58॥
Hanuman's eyes, which were following the path of the wind and were flashing like lightning, were shining as if forest fires were blazing at two places on the mountain. ॥ 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥