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ramayan 5.1.55: उनके वेग से गिरते फूलों से समुद्र का जल ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो आकाश सुन्दर उगते तारों से भरा हो। 55.   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.1.55 
तस्य वेगसमुद्भूतै: पुष्पैस्तोयमदृश्यत।
ताराभिरिव रामाभिरुदिताभिरिवाम्बरम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उनके वेग से गिरते फूलों से समुद्र का जल ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो आकाश सुन्दर उगते तारों से भरा हो। 55.
 
The flowers that fell with their force made the water of the ocean look like the sky filled with beautiful rising stars. 55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)