vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
»
श्लोक 49
श्लोक
5.1.49
सुपुष्पिताग्रैर्बहुभि: पादपैरन्वित: कपि:।
हनूमान् पर्वताकारो बभूवाद्भुतदर्शन:॥ ४९॥
अनुवाद
फूलों से सुशोभित अनेक वृक्षों के बीच में पर्वत के समान शोभायमान हनुमानजी अद्भुत शोभा पा रहे थे ॥49॥
Joined with many trees whose branches were decorated with flowers, Hanuman, who was like a mountain, appeared wonderfully splendid. ॥ 49॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd