Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.1.47: वे वृक्ष अपनी जाँघों के महान् बल से ऊपर उठकर क्षण भर तक उनके पीछे-पीछे चले, जैसे दूर देश में जाते हुए बंधु-बांधव अपने भाई-बन्धुओं के पीछे-पीछे चलते हैं ॥47॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.1.47 
ऊरुवेगोत्थिता वृक्षा मुहूर्तं कपिमन्वयु:।
प्रस्थितं दीर्घमध्वानं स्वबन्धुमिव बान्धवा:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
वे वृक्ष अपनी जाँघों के महान् बल से ऊपर उठकर क्षण भर तक उनके पीछे-पीछे चले, जैसे दूर देश में जाते हुए बंधु-बांधव अपने भाई-बन्धुओं के पीछे-पीछे चलते हैं ॥47॥
 
The trees, lifted up by the great force of their thighs, followed them for a moment, just as relatives follow their brothers and relatives on their way to a far-off land. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)